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स्वर्गीय श्रीमती सुप्यार कंवर की 35वीं पुण्यतिथि पर आमरस एवं भजनामृत गंगा कार्यक्रम का हुआ भव्य आयोजन

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जयपुर। स्वर्गीय श्रीमती सुप्यार कंवर की 35वीं पुण्यतिथि पर सुप्यार देवी तंवर फाउंडेशन के तत्वावधान में रविवार, 19 मई, 2024 को कांवटिया सर्कल पर भावपूर्ण भजन संध्या का आयोजन के साथ आमरस प्रसादी का वितरण किया गया।  कार्यक्रम में प्रतिभाशाली कलाकारों की आकाशीय आवाजें शांत वातावरण में गुंजायमान हो उठीं, जो उपस्थित लोगों के दिलों और आत्मा को छू गईं। इस अवसर पर स्थानीय जनप्रतिनिधि, आईएएस राजेंद्र विजय, एडिशनल एसपी पूनमचंद विश्नोई, सुरेंद्र सिंह शेखावत, अनिल शर्मा, के.के. अवस्थी, अन्य वरिष्ठ अधिकारीगण सहित सुप्यार देवी तंवर फाउंडेशन के अध्यक्ष राधेश्याम तंवर, उपाध्यक्ष श्रीमती मीना कंवर, मंत्री मेघना तंवर, कोषाध्यक्ष अजय सिंह तंवर एवं गणमान्य अतिथिगण उपस्थित रहे।

कृषक कल्याण फीस का भार किसान-व्यापारी पर नहीं पड़ेगा - गंगवार


जयपुर। प्रमुख शासन सचिव कृषि नरेशपाल गंगवार ने बताया कि कृषि उपज मंडी में उपज की खरीद-बिक्री पर लगाई गई कृषक कल्याण फीस का भार किसान और व्यापारी पर नहीं पड़ेगा। पड़ोसी राज्यों में मंडी और विकास शुल्क मिलाकर अभी भी राजस्थान से ज्यादा है। इस फीस से मिलने वाली राशि का पूरा उपयोग मात्र किसान कल्याण के लिए ही किया जाएगा। यह फीस किसानों से नहीं वसूली जाएगी।
                                  
गंगवार ने बताया कि कृषक कल्याण फीस से मिलने वाली राशि राजस्थान राज्य कृषि विपणन बोर्ड के  कृषक कल्याण कोष में जमा होगी, जिसका उपयोग केवल किसान और खेती के कल्याण की गतिविधियों और योजनाओं के संचालन के लिए किया जाएगा। इस कोष की बदौलत ही किसानों को समय पर फसल खराबे का बीमा क्लेम मिलना सम्भव हो पाया है। साथ ही एग्रो प्रोसेसिंग इंडस्ट्री के लिए अनुदान एवं कई अन्य सुविधाओं की शुरुआत की गई है जिसका सीधा लाभ किसान और व्यापारियों को हो रहा है। 


गंगवार ने बताया कि इस फीस का भार किसानों व व्यापारियों पर नहीं पडे़गा। राजस्थान में पड़ोसी राज्यों से मण्डी शुल्क की दरें पहले से ही कम हैं। राजस्थान में अधिसूचित कृषि जिन्सों का अधिकतम मण्डी शुल्क 1.60 प्रतिशत है जबकि पड़ोसी राज्यों में मण्डी शुल्क की दरें तुलनात्मक रूप से अधिक है। पंजाब में 3 एवं हरियाणा-उत्तर प्रदेश में 2 फीसदी तक है। पंजाब-हरियाणा आदि राज्यों में मण्डी शुल्क के अतिरिक्त विकास शुल्क भी लिया जा रहा है। पंजाब में विकास शुल्क 3 एवं हरियाणा में 2 प्रतिशत है। इस प्रकार राजस्थान में कृषक कल्याण फीस लागू होने के बावजूद कुल शुल्क पंजाब-हरियाणा से कम है।   
                   
प्रमुख शासन सचिव ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2019-20 के परिवर्तित बजट में किसानों के लिए 'Ease of Doing Business' की तर्ज पर 'Ease of Doing Farming' की ओर पहला बड़ा कदम उठाते हुए 1 हजार करोड रुपए के ‘‘कृषक कल्याण कोष के गठन एवं इस कोष को किसानों को उनके उत्पादों का यथोचित मूल्य दिलाने के लिए काम में लिये जाने की घोषणा की गई थी। उन्होंने बताया कि इस घोषणा की अनुपालना में षि उपज मण्डी अधिनियम में गत वर्ष 16 दिसम्बर को संशोधन कर कृषक कल्याण कोष गठित किया गया।


इस कोष के माध्यम से समर्थन मूल्य पर क्रय की जा रही कृषि जिन्सों के तुरन्त भुगतान के लिए निधि की व्यवस्था,  कृषि जिन्सों के बाजार भाव गिरने पर बाजार हस्तक्षेप योजना लागू करने, प्लेज फाईनेन्सिंग, कृषि प्रसंस्करण, राजस्थान  कृषि व्यवसाय व कृषि निर्यात को प्रोत्साहन नीति के अन्तर्गत अनुदान स्वीकृति के लिए वित्त प्रबंधन एवं राज्य सरकार के अनुमोदन से कृषक कल्याण से संबंधित अन्य गतिविधियां करने का प्रावधान किया गया। घोषणा की अनुपालना में राजस्थान राज्य  कृषि विपणन बोर्ड की ओर से 1-1 हजार करोड कुल 2 हजार करोड का ऋण क्रमशः ओरियन्टल बैंक ऑफ कामर्स एंव पंजाब नेशनल बैंक से राज्य सरकार की प्रतिभूति एवं ब्याज व मूलधन के पुनर्भुगतान की वचनबद्धता के आधार पर लिया गया है। इस राशि में से 1500 करोड रुपए कृषि विभाग को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के राज्यांश प्रीमियम भुगतान के लिए हस्तान्तरित किए जाने की स्वीकृति जारी की गई है। भविष्य में भी इस कोष से राज्यांश प्रीमियम के लिए राशि की स्वीकृति जारी किया जाना सभ्भावित है।


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