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कोरोना तय करेगा राजनीतिक भविष्य....

> पॉजिटिव आने पर फ्लोर टेस्ट से रोका जा सकता है


हरीश गुप्ता
जयपुर। अगस्त का महीना शुरू होते ही सभी को इंतजार रहता है स्वतंत्रता दिवस का। राजनीति से जुड़े लोगों को इस बार 15 से ज्यादा इंतजार 14 अगस्त का है। कारण उस दिन से विधानसभा का सत्र शुरू होना है। शायद यह किसी को पता नहीं कि एक चौथा खेमा ऐसा है जो सभी के होश उड़ा सकता है। चौथा खेमा कोरोना वायरस है। जी हां राजस्थान की राजनीति अब कोरोना तय करेगा।


गौरतलब है उत्तर प्रदेश में एक मंत्री की कोरोना से मौत हो चुकी है। एजेंसी के मुताबिक केंद्रीय मंत्री अमित शाह भी पॉजिटिव आ गए हैं। वैसे भी जो पॉजिटिव आया उसे सदन में प्रवेश की अनुमति नहीं मिलेगी। हालांकि यह निर्भर करता है विधानसभा अध्यक्ष के फैसले पर।


जानकारी के मुताबिक राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं जोरों पर है, 'अगर विधानसभा अध्यक्ष ने सभी विधायकों की कोविड-19 जांच करवा दी तो कोरोना राजनीतिक संकट पैदा कर सकता है।' जो फ्लोर टेस्ट के सपने देख रहे हैं कोरोना उनके सपने तोड़ सकता है।


वर्तमान में राजस्थान का राजनीतिक संकट अभी गहराया हुआ है। इसमें गहलोत, सचिन और भाजपा के बीच कोरोना बड़ा पेंच बनकर उभर सकता है। अगर किसी विधायक की रिपोर्ट पॉजिटिव आ गई तो वह फ्लोर टेस्ट नहीं दे पाएगा। इसलिए ऐसी संभावना जताई जा रही है कि हार जीत की पैंतरेबाजी पर कोरोना भारी पड़ सकता है।


सूत्रों ने बताया कि इस सोच के पीछे कुछ नेताओं का तर्क है कि राज्यसभा के चुनाव के समय वाजिद अली ऑस्ट्रेलिया से आए थे। तब उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। बाद में फिर से जांच करवाई गई। इस पर वे वोट देने आए थे, लेकिन भाजपा नेता राजेंद्र सिंह राठौड़ ने विरोध किया तो अली को पीपीई किट पहनाकर वोट दिलाया गया।


सूत्रों की मानें तो 14 अगस्त को भी ऐसे हालात देखने को मिल सकते हैं। हो सकता है कई विधायक पीपीई किट पहनकर आएं। हो सकता है कुछ पॉजिटिव आए तो उन्हें फ्लोर टेस्ट से भी रोका जा सकता है। ऐसे में दोनों खेमे जो सरकार बचाने में और दूसरा सरकार गिराने में लगा हुआ है, दोनों को कोरोना रूपी दुष्ट को मनाना होगा। बिल्कुल वैसे जैसे किसी शुभ कार्य की शुरुआत पर भैरूजी को मनाना होता है।


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